ॐ
गीता की कुछ शब्दावली - २२१
अल्प बुद्धयः (अध्याय १६ - श्लोक ९)
அல்ப புத்தயஹ .. (அத்யாயம் 16 - ஶ்லோகம் 9)
Alpa Budhdhayah (Chapter 16 - Shloka 9)
अर्थ : अल्प बुद्धि युक्त असुर ..
अल्प यह हमारे घरों में डांट फटकार का शब्द था । अल्प याने छोटा या कम .. बहुत छोटे विषयों की इच्छा करना , बहुत छोटे विषयों की चिन्ता करना , छोटे आघातों पर दुःखी होना , स्वयं को छोटा समझना .. ये अल्प बुद्धि को दर्शाते हैं । छोटे बातों से संतुष्ट होना अल्प संतुष्टी है ।
"असुर अल्प बुद्धि वाला है" श्री कृष्ण यहाँ कह रहे हैं । स्वयम् को आदि - अन्त रहित , नित्य स्थित , सर्वज्ञ , सर्व शक्तिमान , सर्वाधार श्री परमात्मा का लघु अंश ना मानकर अल्प आयु वाला नश्वर शरीर के साथ अल्प क्षमता , अल्प शक्ति और अल्प बुद्धि युक्त , अपने अल्प सुखों की पूर्ती के लिए भी अन्यों पर निर्भर एक पराधीन जीव मानने वाला असुर को अल्प बुद्धि वाला कह रहे हैं श्री कृष्ण ।
आज के संसार में कम्यूनिज़म बोलने वाले और नास्तिक वाद करने वाले इस अल्प बुद्धि के प्रदर्शक हैं । इनके विचार से , "यह एक ही संसार , बस केवल शरीर और उसकी आवश्यकतायें , केवल इन्द्रयों से ग्राह्य सुख" , "देव , अध्यात्म , तपस , व्रत , शील , चारित्र्य , संयम , भक्ति , देशभक्ति , त्याग , सरलता , सत्य , आदि सभी अनावश्यक हैं । कपोल कल्पित हैं" । "मत , सम्प्रदाय , विवाह , देश ार देश की सीमायें आदि व्यवस्थायें मिटा दिये जानी चाहिये" ।
अपने अल्प बुद्धि के इस विचार को मूढ़ता से धर कर , उस विचार को संसार में प्रस्थापित करने , कम्यूनिस्टों ने यूरोप और चीन में राज्य प्रशासन को अपने कब्जे में लेकर कठोर प्रयास किया । नास्तिक वाद करने वाले कळगम ने उसी प्रकार तमिल प्रदेश में राज्य प्रशासनपर कब्जा कर कठोर प्रयास किया । इन प्रयासों का प्रभाव संसार पर , समाज पर कैसा होता है इसका वर्णन श्री कृष्ण ने ५१५३ वर्षों पूर्व किया है । श्री कृष्ण द्वारा कही गयी बात और आज का प्रत्यक्ष दृश्य । आईये । अगली शब्दावली में देखें ।
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