ॐ
गीता की कुछ शब्दावली - २२२
प्रभवन्त्युग्र कर्माणः क्षयाय जगतः अहिताः (अध्याय १६ - श्लोक ९)
ப்ரபவந்த்யுக்ர கர்மாணஹ க்ஷயாய ஜகதஹ அஹிதாஹ (அத்யாயம் 16 - ஶ்லோகம் 9)
Prabhavantyugra Karmaanah Kshayaaya Jagato(a)Hitaah (Chapter 16 - Shlokam 9)
अर्थ : जगत अहित पहुँचाने वाले और नाश करने वाले असुर ।
विषैली कीट नाशक का उपयोग कर मच्छरों को या मक्खियों को मारना नहीं , ऐसा विचार कई परिवारों में आज भी है । क्यों ?? घर में यदि साँप भी आ जाए तो , "अरे बाबा !! उसे मारना नहीं । कहीं बाहर छोड़ दो । यह तो उसका इलाका है , जिसमें हम घुस आए हैं ।" ऐसा सोचने वाले कई ब्राह्मण परिवार हैं । मैं स्वयं जिन स्थानों में रहा हूँ , उनमें तीन घरों में साँप आया है । मारा नहीं गया । श्री कृष्ण कह रहे हैं की उग्र कर्म करता है असुर और समाज को , संसार को नाश पहुँचाता है । श्री कृष्ण उसे संसार का दुश्मन कह रहे हैं ।
ट्यानन्मन चौक पर सेना के टेंकों से अपने ही देश के दो तीन सहस्र विद्यार्थियों को कुचल कर मारा चीनी कम्यूनिस्ट सरकार ने । अल्ला हु अकबर का नारा लगाते हुए , मुस्लिम आतंकवादी अपने दुश्मन का गला काटकर क्रूरता से मारने का दृश्य दैनिक दृश्य है । अपने सिद्धांत के दुश्मन लाख लाखों को साइबीरिया के रेगिस्तान में डालकर निर्दयता से मारता था रश्या का पूर्व कम्यूनिस्ट शासन । गुजरात के गोधरा में रेल गाडी में सो रहे साठ करसेवक को , बच्चे और महिला सहित , बाहर निकलने के द्वार बंद कर निष्ठुरता से जलाकर मारा मुस्सलमान आतंकियों ने । अपनी नटी नेता भ्रष्टाचार के कारण क़ैद हुई तो तमिल नाडु में अन्ना द्रमुक के नेताओं ने बस को फूंककर अंदर बैठे जवान लड़कियों को मारा । पूर्व प्रधान मंत्री श्रीमती इंदिरा फिरोज खान की मृत्यु के समय कांग्रेस के गुंडे गली गली में सिख परिवारों को जलाकर मार रहे थे तो युवा प्रधान मंत्री श्री राजीव ने यह कहकर उनकी क्रूरता को सही ठहराया की , "कोई बड़ा वृक्ष गिरता है तो कुछ छोटे पेड़ पौधे और छोटे जीव का मरना स्वाभाविक है" । ये सभी असुर मनो वृत्ति वालों के उग्र कर्मों के समीप काल के उदाहरण हैं ।
असुर संसार को नाश पहुँचाता है । समाज को नाश पहुँचाता है । तमिल नाडु में "भगवान नहीं' का नारा लगाने वाली भीड़ ने राज्य शासन पर कब्जा किया और पचास वर्षों में कैसा कैसा नाश पहुँचाया ?? सामाजिक चारित्र्य को मिटाया । आज सभी क्षेत्रों में , सभी स्तरों में अत्याधिक और व्यवस्थित भ्रष्टाचार है । दारू की बिक्री सरकार का यश माना गया । तीन पीढ़ियों के युवकों का नाश किया । निसर्ग का प्रसाधन को मिटाया । रेत की तस्करी , ग्रेनाइट की चोरी , मुख्य मंत्री और मंत्रियों का धंधा बना है । नदियाँ सुख गयी । मंदिरों को लूटा । मूर्तियों की चोरी और तस्करी , मंदिरों की भूमि का अतिक्रमण , देवालयों के गहनों की चोरी । प्रगति और शिक्षण के क्षेत्र में तमिल नाडु पिछड़ा । सर्वदूर नाश , नाश , और नाश ।
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